भइय्या आपके सर पर सुबह सुबह इतवार की सुबह अगर ढोल बजे तो कैसा लगता है .
अच्चा छोड़ो ये बातो की अगर वो ढोल दिन भर बजता रहे तो . आह ! मेरे इतवार की तो ऐसी मिटटी पलीत हुई है न की पूछो मत.ये लोग इतवार को क्यूँ शादी करतें है ,और अगर करना ही पड़े तो दूसरो के बारे में क्यूँ नहीं सोचते यार.
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